(संवाद एक्सप्रेस)मैनपुर । बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर राजापड़ाव क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है। वर्षों से सिर्फ आश्वासन और कागजी घोषणाओं के भरोसे जी रहे हजारों ग्रामीण सोमवार को निर्णायक संघर्ष के मूड में सड़कों पर उतर आए। कड़ाके की ठंड को दरकिनार करते हुए रविवार रात ही ट्रैक्टर-पिकअप में सवार होकर ग्रामीण अडगड़ी पहुंच गए और स्पष्ट कर दिया—अब सिर्फ वादे नहीं, जमीन पर काम चाहिए।
राजापड़ाव क्षेत्र की पांच पंचायत—गरहाडीह, गौरगांव-कोकड़ी, भुतबेड़ा, कोचेंगा—के हजारों ग्रामीण आज भी अंधेरे में जीवन काटने को मजबूर हैं। जिन तीन पंचायतों में औपचारिक रूप से बिजली पहुंच चुकी है, वहां भी कई पारा-टोला आज तक अंधेरे में डूबे हुए हैं। बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका—हर मोर्चे पर बिजली के अभाव ने ग्रामीण जीवन को जकड़ रखा है।
NH-130 पर चक्काजाम का ऐलान
ग्रामीणों ने साफ किया है कि सुबह 10 बजे के बाद NH-130 पर वाहनों के पहिये थम जाएंगे। उनका कहना है कि वर्षों से गांव से लेकर राजधानी तक ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन हर बार प्रशासन ने सिर्फ आश्वासन देकर बात टाल दी।
ग्रामीणों की दो-टूक प्रतिक्रिया
“आजादी के 75 साल बाद भी हमारे घरों में दीया नहीं, सिर्फ अंधेरा है—ये कैसा विकास?”
“कागजों में गांव जगमगा रहे हैं, हकीकत में बच्चे लालटेन में पढ़ते हैं।”
“नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं—बिजली नहीं आती।”
“अब पीछे हटेंगे नहीं, जब तक लाइन नहीं जुड़ती, आंदोलन जारी रहेगा।”
“बिना बिजली के इलाज, पढ़ाई और रोजगार—सब मजाक बन गया है।”
‘आश्वासन नहीं, समाधान’
ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है कि अब आधे-अधूरे काम और तिथिहीन वादे स्वीकार नहीं। वे मांग कर रहे हैं कि सभी पंचायतों के हर पारा-टोला तक स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक हो।
अब सवाल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से है—क्या राजापड़ाव का अंधेरा दूर होगा, या फिर NH-130 पर थमा यह पहिया शासन की संवेदनशीलता को भी रोक देगा?

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















