मुड़ागांव (कोरासी)। गरियाबंद जिले के सोरिद खुर्द अंचल में पहाड़ों पर स्थित मां रमई पाठ माता का स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। इसे लोग “रमई पाठ पहाड़ों वाली माता” के नाम से भी जानते हैं। यहां चैत्र और क्वांर नवरात्रि में दीप ज्योति प्रज्वलन का आयोजन होता है, जिसमें गरियाबंद के अलावा महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, धमतरी, दुर्ग समेत अन्य जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस स्थल को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की मांग की जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
किंवदंती के अनुसार, प्राचीन समय में भगवान राम सीता की खोज के दौरान इस जंगल में आए थे, जिसके कारण इसका नाम “रमई पाठ” पड़ा। यहां आठवीं शताब्दी की प्राचीन मूर्तियां और रामसेतु पत्थर आज भी मौजूद हैं। विशेष बात यह है कि एक आम के पेड़ की जड़ से सालभर दूध जैसी निर्मल जलधारा अविरल बहती रहती है, जिसका रहस्य आज तक कोई नहीं सुलझा पाया। यहां निःसंतान दंपत्ति संतान की कामना लेकर मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर लोहे का सांकल चढ़ाते हैं।

भक्तों का आस्था स्थल
यह स्थान जंगली क्षेत्र में होने के कारण यहां खरगोश, हिरण, भालू, शेर और चीता जैसे वन्य जीव भी पाए जाते हैं। चैत्र और क्वांर नवरात्रि में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इस अवसर पर बड़े व्यापारियों, उद्योगपतियों, राइस मिल संचालकों और ठेकेदारों की ओर से भंडारा आयोजित किया जाता है।
पर्यटन स्थल बनाने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और रमई पाठ सेवा समिति ने शासन-प्रशासन, सरपंच, विधायक और सांसद से बार-बार आग्रह किया है कि रमई पाठ माता स्थल को पर्यटन स्थल घोषित किया जाए। उनका कहना है कि उचित विकास कार्य और सुविधाओं के साथ यह स्थान छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थल बन सकता है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















