(संवाद एक्सप्रेस)कोरबा। जिले में धान खरीदी व्यवस्था की खामियां अब जानलेवा साबित होने लगी हैं। धान बेचने में आ रही लगातार परेशानियों से त्रस्त किसानों के आत्मघाती कदम की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते 24 घंटे के भीतर यह दूसरा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र, जनप्रतिनिधियों और सरकार की नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरदीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम झांझ निवासी बैसाखू गोंड़ पिता भुरूवा गोंड़ (उम्र लगभग 60 वर्ष) ने आज दोपहर करीब 1:30 से 2 बजे के बीच किसी कीटनाशक पदार्थ का सेवन कर लिया। बताया जा रहा है कि वह धान खरीदी में आ रही लगातार दिक्कतों, रकबा में कमी दिखाए जाने और कम पैदावार दर्ज होने के कारण धान बिक्री न हो पाने से मानसिक रूप से बेहद परेशान था।

कीटनाशक सेवन के बाद बैसाखू गोंड़ सीधे हरदीबाजार तहसील कार्यालय पहुंच गया। जैसे ही उसने वहां मौजूद कर्मचारियों को अपने द्वारा जहर सेवन करने की जानकारी दी, तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी गई। इसी दौरान संयोगवश रास्ते से गुजर रहे जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए अपनी गाड़ी में किसान को तुरंत हरदीबाजार के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। पुलिस भी मौके पर पहुंची और बाद में अस्पताल जाकर मामले की जानकारी ली।
फिलहाल किसान का उपचार जारी है और डॉक्टरों के अनुसार समय रहते अस्पताल पहुंचने से उसकी जान बच गई। पुलिस द्वारा मामले में आवश्यक पूछताछ की जा रही है और समाचार लिखे जाने तक जांच की प्रक्रिया जारी थी।

24 घंटे में दूसरा मामला, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
गौरतलब है कि इससे पहले भी धान खरीदी में आ रही अव्यवस्थाओं से परेशान एक अन्य किसान द्वारा जहर सेवन किए जाने का मामला सामने आया था। उस घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर पाली एसडीएम रोहित सिंह ने तत्काल राजस्व अमले और संबंधित प्रबंधकों की बैठक बुलाकर समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया था। लापरवाही बरतने के आरोप में हल्का पटवारी कामिनी को निलंबित किया गया, वहीं तहसीलदार और फड़ प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अब दूसरा मामला सामने आना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान अभी भी अधूरा है।
धान खरीदी व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि रकबा कम दिखाया जाना, टोकन न मिलना, खरीदी केंद्रों पर अस्पष्ट नियम, अधिकारियों-कर्मचारियों की उदासीनता और समय पर समाधान न होना उनकी परेशानी का मुख्य कारण है। इन्हीं कारणों से आर्थिक और मानसिक दबाव में आकर किसान इस तरह के खतरनाक कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि आत्मघाती कदम किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, लेकिन ऐसी घटनाएं प्रशासन और सरकार के लिए चेतावनी जरूर हैं कि यदि समय रहते ठोस सुधार नहीं किए गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
आगे क्या?
अब जब 24 घंटे के भीतर दूसरा मामला सामने आया है, तो यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन आगे क्या ठोस कदम उठाता है। किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान, धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।
वरना हरदीबाजार और कोरबा की ये घटनाएं आने वाले समय में और भी बड़ा सामाजिक संकट बन सकती हैं।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments



