(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद।प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में आस्था और सांस्कृतिक संगम के रूप में पहचान रखने वाला राजिम कुंभ मेला इस वर्ष बदइंतजामी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। करोड़ों रुपये के बजट और महीनों की तैयारियों के बावजूद मेले की जमीनी हकीकत ने जिला प्रशासन और राज्य शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक फरवरी से पंद्रह फरवरी तक आयोजित माघ पुन्नी कुंभ मेले का आयोजन गरियाबंद, रायपुर और धमतरी जिलों के समन्वय से किया जा रहा है। शासन की ओर से इस बार मेले को और भव्य एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। उद्देश्य था कि प्रदेश की सांस्कृतिक छवि सुदृढ़ हो, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पर्यटन को बढ़ावा मिले। लेकिन आयोजन स्थल पर नजर आने वाली तस्वीरें इन दावों से मेल नहीं खा रहीं।
सांस्कृतिक मंच पर सन्नाटा
राजिम कुंभ का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक महोत्सव रहा है, जहां देश-प्रदेश के ख्यातनाम कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। इस वर्ष भी मंच सजा, कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, लेकिन दर्शक दीर्घा में खाली पड़ी कुर्सियों ने आयोजन की चमक फीकी कर दी।
मीडिया दीर्घा से लेकर आम दर्शकों की सीटों तक सन्नाटा पसरा रहा। कई कार्यक्रमों में गिनती के लोग ही नजर आए। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या कार्यक्रमों का चयन जनरुचि के अनुरूप नहीं था या फिर प्रचार-प्रसार की कमी के चलते लोग आयोजन से जुड़ नहीं पाए।

भोजन व्यवस्था में बड़ी चूक
अव्यवस्थाओं का सबसे गंभीर मामला नौ फरवरी को सामने आया, जब मेले के नौवें दिन कलाकारों और अन्य सहयोगी कर्मियों के लिए भोजन की व्यवस्था तक नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि कई कलाकारों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
स्थिति इतनी बिगड़ी कि क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू को मौके पर नाराज़गी जतानी पड़ी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी रही, जिससे आयोजन की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
करोड़ों खर्च, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नदारद
सूत्रों के अनुसार मेले के आयोजन के लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और सूचना प्रणाली जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कई श्रद्धालुओं ने अव्यवस्थित पार्किंग और धूल भरे रास्तों को लेकर नाराज़गी जताई।
प्रशासनिक दावों पर सवाल
जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में दावा किया गया था कि इस बार मेले को तकनीकी रूप से सुसज्जित और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। सुरक्षा, साफ-सफाई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बेहतर प्रबंधन की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी हालात इन दावों के विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो यह प्रतिष्ठित आयोजन अपनी गरिमा खो सकता है। राजिम कुंभ केवल धार्मिक मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में अव्यवस्थाएं प्रदेश की छवि पर भी असर डाल सकती हैं।
आगे क्या?
अब सवाल यह है कि मेले के शेष दिनों में प्रशासन हालात को कितना सुधार पाता है। क्या खाली कुर्सियां भरेंगी? क्या कलाकारों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पाएंगी? या फिर इस वर्ष का राजिम कुंभ अव्यवस्थाओं की वजह से याद किया जाएगा?
फिलहाल, राजिम कुंभ मेला आस्था के संगम के साथ-साथ प्रशासनिक प्रबंधन की परीक्षा भी बन गया है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments







