(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। जिला गरियाबंद में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत पुलिस को पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व सफलता हाथ लगी है। जनवरी 2024 से अब तक चलाए गए लगातार विशेष अभियानों में 07 शीर्ष नेतृत्व सहित कुल 31 माओवादियों को मार गिराया गया है, जबकि 29 नक्सलियों ने पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है।
पुलिस की रणनीतिक कार्रवाई, बेहतर खुफिया तंत्र और विशेष प्रशिक्षण के चलते नक्सल संगठन को करारा झटका लगा है। खास बात यह रही कि इस दौरान कई बड़े और निर्णायक ऑपरेशन में शीर्ष स्तर के माओवादी नेताओं का सफाया किया गया, जिससे संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है।

बड़े ऑपरेशन बने टर्निंग पॉइंट
जनवरी 2025 में 19 से 23 तारीख के बीच बेसराझर-भालूडिग्गी के पहाड़ी इलाकों में चलाए गए विशेष अभियान ने इतिहास रच दिया। इस ऑपरेशन में पहली बार छत्तीसगढ़ में माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाते हुए सीसी सदस्य चलपति, एसजेडसीएम सत्यम गावड़े, जयराम उर्फ गुड्डू और आलोक सहित कुल 16 माओवादियों को ढेर किया गया।
इसके बाद 11-12 सितंबर 2025 को ग्राम मेटाल-भालूडिग्गी क्षेत्र में एक और बड़े ऑपरेशन में सीसी सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्णना, एससीएम प्रमोद उर्फ पाण्डू और विमल उर्फ सुरेन्द्र उर्फ जाड़ी वेंकट समेत 10 माओवादियों को मार गिराया गया।
इन दोनों अभियानों ने गरियाबंद जिले को नक्सल गतिविधियों के खिलाफ मजबूत बढ़त दिलाई।

आत्मसमर्पण से कमजोर हुआ नेटवर्क
नक्सलियों के खिलाफ बढ़ते दबाव का असर यह हुआ कि कई एरिया कमेटियों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।
7 नवंबर 2025 को उदंती एरिया कमेटी ने आत्मसमर्पण किया
19 जनवरी 2026 को एसडीके और सीनापाली एरिया कमेटी ने सरेंडर किया
23 जनवरी 2026 को सीतानदी एरिया कमेटी ने धमतरी में पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया
इन आत्मसमर्पणों के साथ ही धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन में नक्सल नेटवर्क का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया।
2024 की मुठभेड़ से बदली रणनीति
25 जनवरी 2024 को टोरीभुई-सिकासेर क्षेत्र में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में बीजापुर निवासी महिला नक्सली पार्वती के मारे जाने से यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में बड़े माओवादी नेता सक्रिय हैं।
इस इनपुट के बाद गरियाबंद पुलिस ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। ऑपरेशन टीम का पुनर्गठन किया गया, विशेष प्रशिक्षण दिया गया और आधुनिक संसाधनों से लैस कर लगातार अभियान चलाए गए। इसी रणनीतिक बदलाव का नतीजा रहा कि बाद के ऑपरेशन बेहद सफल साबित हुए।

भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जब्त
पुलिस को अभियानों के दौरान भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी हाथ लगी है—
ग्रेडेड हथियार: 31
अन्य हथियार: 44
कुल हथियार: 75
इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 304
नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 22
आईईडी बम: 14
कॉर्डेक्स वायर: लगभग 114.49 मीटर
बीजीएल सेल: 89
एक करोड़ से अधिक की नकदी बरामद
अभियानों के दौरान माओवादियों से कुल 1,08,81,500 रुपए (एक करोड़ आठ लाख इक्यासी हजार पांच सौ रुपए) की बड़ी रकम भी जब्त की गई है।
समग्र उपलब्धि
31 माओवादी मारे गए (7 शीर्ष नेतृत्व सहित)
29 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
75 हथियार और बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद
1 करोड़ से अधिक की नकदी जब्त
गरियाबंद पुलिस की सतत कार्रवाई, सटीक रणनीति और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ के चलते जिले में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा नियंत्रण स्थापित हुआ है। लगातार मिल रही सफलताओं से यह साफ है कि आने वाले समय में क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















