संवाद एक्सप्रेस | जिला ब्यूरो शहडोल | विजय कुमार विश्वकर्मा
शहडोल। जिले के नगर परिषद बकहो अंतर्गत वार्ड क्रमांक 5 अमलई बस्ती इन दिनों विकास के एक नए “अनोखे मॉडल” का गवाह बन रहा है। यहां विकास का अर्थ शायद जमीन के ऊपर नहीं बल्कि जमीन के नीचे तलाशा जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि बस्ती के नीचे सुरंग बनाकर कोयले का अवैध खनन खुलेआम जारी है और प्रशासन मानो गहरी नींद में लीन है।
अमलई बस्ती में जिस जगह सुरंग बनाकर कोयला निकाला जा रहा है, उससे महज लगभग 200 मीटर की दूरी पर क्षेत्र का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान कार्मल कॉन्वेंट स्कूल स्थित है। यहां हजारों बच्चे पढ़ने आते हैं और अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देखते हैं। मगर विडंबना देखिए कि बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत करने के बजाय उनके पैरों के नीचे की जमीन ही खोदी जा रही है। बताया जा रहा है कि सुरंग इतनी आगे तक बढ़ चुकी है कि स्कूल के नीचे तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

अब सवाल यह उठता है कि जब जमीन के नीचे से कोयला निकाला जा रहा है तो ऊपर की जमीन कितने दिन तक टिकेगी? क्योंकि इतिहास गवाह है कि इसी इलाके में पहले भी एक प्राथमिक विद्यालय जमीन धंसने के कारण धरातल में समा चुका है। लेकिन लगता है कि उस घटना से किसी ने कोई सबक नहीं लिया।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि इस सुरंग से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हजारों की संख्या में मकान बने हुए हैं। इन घरों में रहने वाले लोग हर दिन अनजाने खतरे के साथ जिंदगी जी रहे हैं। किसी भी समय जमीन धंसने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन जिम्मेदार विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले अमलाई थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी ने इस अवैध खनन को सख्ती से बंद करा दिया था। लेकिन समय बीतते ही मानो अवैध कारोबारियों के हौसले फिर बुलंद हो गए और कथित तौर पर गुली खान के नेतृत्व में फिर से सुरंग बनाकर कोयले का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया गया।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बताया जा रहा है कि इस पूरे अवैध कारोबार का संचालन किसी खदान कार्यालय से नहीं बल्कि रूंगटा मोड़ स्थित एक चाय की दुकान से किया जाता है। आरोप है कि इस चाय दुकान को मोहरा बनाकर पूरा नेटवर्क संचालित किया जाता है। यहां बैठकर अवैध कारोबार से जुड़े लोग मीटिंग करते हैं, रणनीति बनाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
चूंकि यह चौराहा NH-43 पर स्थित है और बुढार, धनपुरी व बकहो को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए प्रशासनिक वाहनों की आवाजाही पर भी यहीं से नजर रखी जाती है। यदि कहीं से पुलिस या प्रशासन की गाड़ी आती दिखाई दे जाए तो सूचना तुरंत आगे पहुंचा दी जाती है, जिससे अवैध खनन में लगे लोग समय रहते सतर्क हो जाएं। यानी व्यवस्था इतनी चुस्त कि मानो कोई “अंडरग्राउंड कंट्रोल रूम” चल रहा हो।
अब स्थानीय लोगों ने नवागत अमलाई थाना प्रभारी से उम्मीद जताई है कि वे इस अवैध खनन पर जल्द से जल्द पूर्ण रूप से रोक लगाएंगे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो मजबूर होकर जनमानस इसी स्थान पर टेंट लगाकर आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होगा।
फिलहाल हालात यह हैं कि एक ओर बच्चे स्कूल में उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रहे हैं और दूसरी ओर उन्हीं सपनों के नीचे की जमीन खोदी जा रही है। प्रशासन की खामोशी और अवैध खनन की सक्रियता के बीच सवाल यही उठता है कि आखिर पहले जागेगा कौन—प्रशासन या कोई बड़ा हादसा?

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















