शंकर लहरे(संवाद एक्सप्रेस) सरायपाली/बसना। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर से प्रारंभ हो चुका है मगर अब भी कई किसानों का पंजीयन नहीं हो पाने से सैकड़ो किसान तहसील एवं सहकारी समिति कार्यालय का चक्कर काटने विवश हैं। मिली जानकारी के अनुसार पिछले तीन-चार सालों से जो सह खातेदार किसान धान खरीदी हेतु पंजीयन कर कर धान बेचते आ रहे थे उन किसानों का एग्री स्टेक में पंजीयन नहीं होने से इस साल धान बेचने से वंचित हो सकते हैं। उन्हें न तो समर्थन मूल्य का लाभ मिल पाएगा न ही आदान योजना की राशि मिल पाएगी। 25 नवंबर धान पंजीयन के लिये आखिरी तारीख है। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि करें तो करें क्या।
किसानों ने तहसीलदार से इस संबंध में कई मर्तबा मिलकर इस समस्या का समाधान के लिए गुहार लगा चुके हैं मगर कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बसना तहसील क्षेत्र के किसान जिनका नाम ऋण पुस्तिका में हिस्सेदार कृषक के रूप में दर्ज है और उनका खाता विभाजन नहीं हो पाया है या फिर प्रकरण तहसील कार्यालय में लंबित है, ऐसे किसान जो मौखिक रूप से बंटवारा कर वर्षों से खेती करते आ रहे हैं उनका पृथक से पंजीयन नहीं हो पाया है। जबकि इन ये किसान पिछले तीन सालों से अपने नाम से पंजीयन कर धान बेचते आ रहे हैं। इस बार नए नियम के तहत एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन करने की नई व्यवस्था लागू की गई है। जिसमें नंबरदार कृषक का तो पंजीयन हो रहा है मगर हिस्सेदार कृषकों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है। बसना तहसील क्षेत्र के कृषक वीरेंद्र सेठ रोहिना, रामचरण चौधरी बिरसिंगपाली, धनुर्जय पटेल टीपा, ईश्वर पटेल बिछियां आदि कई कृषकों का पंजीयन नहीं होने से धान नहीं बेच पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार सालों से पृथक से पंजीयन करा कर धान बेचते आ रहे थे मगर इस बार एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं होने से काफी परेशान है। इस समस्या को लेकर अधिकारियों जनप्रतिनिधियों से कई बार मिल चुके हैं मगर इसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















