गरियाबंद। प्रदेश में नशा तस्करों ने शायद सोचा होगा कि पुलिस दीवाली की छुट्टी पर होगी—लेकिन पुलिस ने साबित कर दिया कि “हम तो 24×7 ऑन मूड” हैं। नतीजा यह हुआ कि दो अलग-अलग प्रकरणों में कुल 47.958 किलो ‘हरी पत्ती’ के साथ चार आरोपी पटरी से उतार दिए गए।
पहली खेप – तवेरा ट्रैवल्स: उड़ीसा से दुर्ग तक ‘गांजा-परिवहन सेवा’
छुरा पुलिस को मुखबिर ने बताया कि एक सफेद तवेरा में दो भाई लोग सब्जी मंडी की जगह सीधा दुर्ग जा रहे हैं—वो भी 38 पैकेट “भूरे रंग के टेप कवर स्पेशल” के साथ!
पुलिस ने घेराबंदी की और तवेरा को रोक लिया। अंदर दो सज्जन मिले—

1. राजू रजक उर्फ झग्गर,2. दिलीप साहू,
जिन्हें शायद लगा होगा कि कार में एयर फ्रेशनर लगाकर गंध छुप जाएगी।
लेकिन पुलिस की नाक ने बता दिया—“इसमें एयर फ्रेशनर नहीं, एक्टिवा फ्रेशनर है!”
तलाशी में 29.408 किलो गांजा, तवेरा, मोबाइल और 1200 रुपए मिल गए, यानी ‘दुनिया घूमाने’ वाला पूरा सेट।
दूसरी खेप – सेंट्रो सुपर-स्पेशल: मेन गेट से सीधे जेल गेट
फिंगेश्वर पुलिस जब मेन गेट पर चेकिंग कर रही थी, तो एक सेंट्रो आई जो शायद सोच रही थी,
“मुझे कौन रोकेगा? मैं तो छोटी हूं।”
लेकिन पुलिस ने छोटे वाहन को भी बड़ा मानकर रोक लिया।
अंदर बैठे थे—

1. छम्मन साहू,2. किशन निषाद,
जो ‘लॉन्ग ड्राइव’ पर नहीं, ‘लॉन्ग टर्म के लिए जेल’ की ओर जा रहे थे।
बोरी खोली गई तो 31 पैकेट, कुल 18.550 किलो गांजा मिला।
दो मोबाइल और कार जब्त—शायद दोनों मोबाइल में रुट मैप भी सेव होगा:
“उड़ीसा → दुर्ग → पुलिस थाने”
पुलिस का “पैकेट टू पैकेट फिनिश”
दोनों मामलों में कुल बरामदगी—
47.958 किलो गांजा – कीमत 5,72,080 रुपए
2 चार पहिया वाहन – कीमत 4,50,000 रुपए
4 मोबाइल – 24,200 रुपए
कुल जुमला – 10,47,480 रुपए

यानी अगर कोई सोच रहा था कि ‘नशा कारोबार’ स्टार्टअप मॉडल है, तो पुलिस ने आज ही इस स्टार्टअप का हार्ड रीसेट कर दिया।
नतीजा
कहते हैं—
“कानून के हाथ लंबे होते हैं”
लेकिन गरियाबंद पुलिस ने दिखा दिया कि
“अगर हाथ लंबे न हों, तो घेराबंदी कर लेते हैं।”
नतीजा—
चार आरोपी, दो गाड़ियां, लगभग 48 किलो सामान, और पुलिस की एक और “विजय यात्रा” पूरी!

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















