गरियाबंद/विशेष रिपोर्ट।
सावन और भाद्रपद के पावन माह में मनाया जाने वाला तीज पर्व महिलाओं के आस्था, श्रद्धा और वैवाहिक सुख-समृद्धि का प्रतीक है। तीज को मुख्य रूप से देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की सुख-शांति की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु व्रत रखती हैं।
🌺 तीज का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तप किया था। अंततः 108वें जन्म में उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। जिस दिन यह दिव्य संयोग हुआ, वह सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। तभी से यह पर्व हर वर्ष “तीज” के रूप में श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है।

🌼 तीज के तीन प्रमुख प्रकार
भारत और नेपाल में तीज के तीन प्रमुख रूप मनाए जाते हैं, जिनकी अपनी-अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं—
1. हरियाली तीज – सावन मास में मनाया जाने वाला यह त्योहार शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का उत्सव है। इस दिन महिलाएँ हरे वस्त्र, चूड़ियाँ और श्रृंगार धारण कर झूले झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और सामूहिक रूप से पूजा करती हैं।
2. कजरी तीज – यह भाद्रपद मास में मनाई जाती है। इसमें महिलाएँ मिट्टी के गीत “कजरी” गाती हैं और पारंपरिक नृत्य करती हैं। कजरी तीज में वर्षा ऋतु और धरती की हरियाली का विशेष महत्व माना जाता है।
3. हरतालिका तीज – यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। कथा के अनुसार, पार्वती जी अपनी सहेलियों के साथ वन में जाकर भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु कठोर तप करती हैं। इस दिन महिलाएँ निराहार व्रत रखती हैं और रात्रि जागरण कर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
🌹 आस्था और परंपराएँ
विवाहित महिलाएँ इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं और व्रत रखती हैं। शिव-पार्वती की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। गाँव-गाँव और शहरों में महिलाएँ सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन, लोकगीत और झूला कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। अविवाहित कन्याएँ इस दिन मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए उपवास करती हैं।
🌿 सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
तीज न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह लोक संस्कृति और परंपराओं को भी संजोए हुए है। हरे-हरे वस्त्र, लोकगीत, नृत्य और महिलाओं का सामूहिक उत्सव इस पर्व को और भी विशेष बना देता है। तीज पर्व महिलाओं के बीच आत्मीयता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक है।
👉 निष्कर्ष:
तीज पर्व भारतीय संस्कृति में वैवाहिक जीवन की पवित्रता, नारी शक्ति की साधना और आस्था का अद्भुत संगम है। सावन और भाद्रपद में जब पूरा वातावरण हरियाली से भरा होता है, तब तीज का यह त्योहार जीवन में उल्लास, प्रेम और समर्पण का संदेश देता है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















