गरियाबंद/उड़ीसा। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगल आज थोड़ा हल्का महसूस कर रहे हैं, क्योंकि महीनों तक रात में मोटरबाइक की खर्र-खर्र, नदी में बहते सागौन के लट्ठों का जल-कल और लोकेशन बदलने की ‘निंजा तकनीक’ अपनाने वाली पुश्पा गैंग के दो सदस्य आखिरकार मनुष्य रूप में दिख ही गए—और पकड़ भी लिए गए।
वन विभाग की टीम ने 19/11/2025 की सुबह “मॉस्ट वांटेड – लेकिन हमेशा अनुपस्थित” रहने वाले विद्याधर नाइक और लक्ष्मीनारायण बेहरा को घेराबंदी कर धर दबोचा। दोनों उड़ीसा के घुचागुड़ा गांव के निवासी हैं और आरोप है कि जंगल में सागौन के पेड़ों को काटने का ऐसा जुनून था, जैसे कोई वाइन टेस्टिंग का शौक पाल ले।

कहते हैं विभाग उन्हें कई बार पकड़ने गया, पर दोनों आरोपी जंगल की ओट में ऐसे गायब हो जाते थे जैसे जंगल का ही हिस्सा हों—शायद पेड़ बनने की कला भी सीख रखी थी।
लेकिन आज किस्मत पलटी। टीम ने दोनों को घेर लिया और कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें न्यायालय देऊभोग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया, जहां अदालत भी शायद सोच रही होगी—
“अरे, ये लोग सच में मौजूद हैं? या पुश्पा फिल्म के एक्स्ट्रा कलाकार हैं?”
उनकी गिरफ्तारी के बाद विभाग का दावा है कि पुश्पा गैंग की जड़ें लगभग उजागर हो चुकी हैं। उम्मीद है कि अब जंगलों में चल रही ‘अदृश्य कटाई’ बंद होगी और पेड़ चैन की सांस लेंगे—बशर्ते पेड़ों के लिए भी कोई राहत योजना शुरू न हो जाए।
जंगल बोले: आखिरकार शांति का वक्त आया… जब तक अगला गैंग न आ जाए!

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















