(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने वन्यजीव संरक्षण, वन बहाली और जलवायु परिवर्तन शमन के क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों को साझा किया। पिछले चार वर्षों में रिजर्व क्षेत्र से 956 हेक्टेयर (करीब 2500 एकड़) अतिक्रमण हटाकर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अविच्छिन्न आवास तैयार किए गए हैं। इस भूमि की अनुमानित नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) लगभग 573 करोड़ रुपये आंकी गई है।
वन विभाग के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान टीम को चार बार जानलेवा हमलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन संरक्षण अभियान लगातार जारी रखा गया। इसी अवधि में 550 से अधिक शिकारी, वन्यजीव तस्कर और अतिक्रमणकारी गिरफ्तार या निरुद्ध किए गए। एंटी-पोचिंग अभियान केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा और महाराष्ट्र में भी कार्रवाई की गई।

दुर्लभ प्रजातियों की बढ़ी मौजूदगी
संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उड़न गिलहरी, माउस डियर, पैंगोलिन, स्मॉल-क्लॉड ऑटर, यूरेशियन ऑटर, चौसिंगा, शाहीन फाल्कन और हाल ही में दर्ज की गई ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति लगातार रिकॉर्ड की जा रही है।
विशेष रूप से पैंगोलिन का पहली बार कैमरा ट्रैप में दर्ज होना तथा मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसी प्रजातियों का नियमित रूप से दिखाई देना रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिक स्थिति का संकेत माना जा रहा है।
इको-टूरिज्म और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी से क्षेत्र में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। वन विभाग का मानना है कि जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक बनकर उभर रहे हैं।

आधुनिक तकनीक से घटा मानव-वन्यजीव संघर्ष
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कई तकनीकी नवाचार अपनाए हैं। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप, थर्मल ड्रोन सर्विलांस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरा सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों से मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ और ‘वीविंग द कैनोपी कवर’ बनी पहचान
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए शुरू की गई “Hornbill Restaurants” पहल के तहत स्थानीय समुदायों और वन विभाग ने फलदार देशी वृक्षों का रोपण और संरक्षण किया है, जिससे पक्षियों को वर्षभर भोजन उपलब्ध हो सके। वहीं “Weaving the Canopy Cover” अभियान के माध्यम से वृक्षों के बीच प्राकृतिक संपर्क बढ़ाकर उड़न गिलहरी और विशाल गिलहरी जैसी वृक्षवासी प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित किए जा रहे हैं।
समुदाय बना संरक्षण का भागीदार
वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी ने संरक्षण अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया है। स्थानीय समुदाय वृक्षारोपण, वन्यजीव निगरानी, अग्नि नियंत्रण और जागरूकता कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में भी अहम योगदान
वन विभाग के अनुसार अतिक्रमण मुक्त कराए गए क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन और वन बहाली तेजी से हो रही है। पुनर्स्थापित वन क्षेत्र बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर कार्बन सिंक के रूप में विकसित हो रहे हैं। इससे कार्बन संचयन बढ़ने के साथ मिट्टी संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, स्थानीय तापमान नियंत्रण और जल स्रोतों के संरक्षण में भी मदद मिल रही है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, सख्त संरक्षण कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से न केवल वन्यजीवों की वापसी संभव है, बल्कि वनों का पुनर्जागरण और जलवायु संरक्षण भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उदंती सीतानदी आज देश में वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति आधारित समाधानों का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















