(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से संचालित योजनाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना, विद्यालयों में शौचालय निर्माण, आश्रम-छात्रावासों में स्वीकृत पदों से अधिक नियुक्तियां तथा विभागीय कार्यालय में कर्मचारियों की पदस्थापना से जुड़े मामलों में जांच, नोटिस और वसूली की कार्रवाई शुरू होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा के केंद्र में आ गई है।
इन मामलों में तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत की भूमिका को लेकर जांच चल रही है। वहीं जनपद पंचायत गरियाबंद से अटैचमेंट पर आदिवासी विकास विभाग में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की पदस्थापना और उन्हें महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार अब तक 117 निर्माण कार्य निरस्त किए जा चुके हैं और संबंधित एजेंसियों एवं ठेकेदारों से 3 करोड़ 33 लाख 92 हजार 284 रुपये की वसूली प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। दूसरी ओर आश्रम-छात्रावासों में अतिरिक्त नियुक्तियों के कारण 3 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक के वेतन भुगतान का विवाद भी सामने आया है।

जांच समिति ने नवीन कुमार भगत को किया तलब
जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी नोटिस में तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त एवं अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत को 3 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में उल्लेख है कि मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के निर्माण कार्यों में शिकायतें प्राप्त होने के बाद कलेक्टर के आदेश से जांच समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उपस्थित नहीं होने पर अब अंतिम नोटिस जारी कर यह स्पष्ट किया गया कि अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।


केस-1: स्कूल जतन योजना में 24 निर्माण कार्य निरस्त
मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत जिले में लगभग 995 निर्माण एवं मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से आदिवासी विकास विभाग को सौंपे गए 165 कार्यों में से बड़ी संख्या में कार्य अधूरे बताए जा रहे हैं।
6 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार 24 निर्माण कार्य निरस्त कर दिए गए और तीन निर्माण एजेंसियों से 2 करोड़ 88 लाख 7 हजार रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए। आदेश में निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर एफआईआर तथा राजस्व वसूली की कार्रवाई का भी उल्लेख है।
केस-2: 116 स्कूलों के शौचालय, 61.88 लाख अग्रिम भुगतान
शिक्षा विभाग के अंतर्गत 116 विद्यालयों में शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए लगभग एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी आदिवासी विकास विभाग को बनाया गया और एक निजी कंपनी को 61 लाख 88 हजार रुपये अग्रिम भुगतान किया गया।
प्रगति रिपोर्ट के अनुसार लगभग 10 माह बाद भी केवल 23 शौचालयों का निर्माण पूरा हुआ, जबकि 93 कार्य शुरू नहीं हुए। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में 93 कार्य निरस्त कर 45 लाख 85 हजार 284 रुपये वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए।

केस-3: 255 स्वीकृत पद, 513 नियुक्तियां
आदिवासी विकास विभाग से जुड़े एक अन्य मामले में आरोप है कि जिले के 79 आश्रम-छात्रावासों में 255 स्वीकृत पदों के विरुद्ध लगभग 513 चपरासियों की नियुक्ति कर दी गई। अतिरिक्त कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद वेतन भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और कर्मचारियों के अनुसार 3 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है।
सहायक ग्रेड-3 आशीष मिश्रा की पदस्थापना पर सवाल
आरोप है कि तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत ने जनपद पंचायत गरियाबंद में पदस्थ आशीष मिश्रा (सहायक ग्रेड-3) को अटैचमेंट के माध्यम से सहायक आयुक्त कार्यालय में पदस्थ किया और उन्हें वित्तीय, निर्माण तथा प्रशासनिक शाखाओं का प्रभार सौंपा गया।
यह भी आरोप है कि विभाग में पहले से कार्यरत लेखपाल रमेश कुमार ध्रुव को बिना समुचित विभागीय प्रक्रिया के शाखा प्रभार से हटाकर आशीष मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई।

जांच के दौरान उसी कार्यालय में पदस्थ रहने पर सवाल
सूत्रों के अनुसार जिन मामलों की जांच चल रही है, उनसे संबंधित दस्तावेज और कार्य भी उसी शाखा से जुड़े हैं जहां आशीष मिश्रा वर्तमान में कार्यरत बताए जा रहे हैं। इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारी को मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाना चाहिए या नहीं।
हालांकि, आशीष मिश्रा के विरुद्ध आरोपों पर अभी किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी है।

पूरे जिले की नजर जांच पर
एक ओर करोड़ों रुपये की वसूली की कार्रवाई जारी है, दूसरी ओर निर्माण कार्य अधूरे हैं और अतिरिक्त नियुक्तियों का वित्तीय बोझ अलग है। ऐसे में यह मामला गरियाबंद जिले के सबसे चर्चित प्रशासनिक प्रकरणों में शामिल हो गया है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति की रिपोर्ट के बाद संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं।

प्रशासन का पक्ष नहीं मिला
इस संबंध में कलेक्टर भगवान सिंह उईके तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















