(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद।जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित सोहागपुर गौशाला में मवेशियों की बदहाली,सड़े-गले पुराने चारे के ढेर और मृत मवेशियों के अवशेष खुले में पड़े होने संबंधी समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया।मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने पशुधन विकास विभाग की जांच टीम गठित कर मौके पर भेजने के निर्देश दिए। लेकिन जांच टीम के पहुंचने से पहले ही गौशाला परिसर का पूरा नजारा बदल गया।
जानकारी के अनुसार समाचार प्रकाशित होने और जांच की भनक लगते ही गौशाला संचालक ने आनन-फानन में परिसर में फैली गंदगी साफ करवाई,पुराने सड़े चारे को हटाया गया तथा मृत मवेशियों के अवशेषों को भी गायब कर दिया गया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि यदि गौशाला पहले से ही व्यवस्थित थी तो जांच से पहले इतनी जल्दबाजी में सफाई अभियान चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?

जानकारी के अनुसार जांच टीम के सामने गौशाला प्रबंधन ने इस वर्ष तीन मवेशियों की मौत होने की जानकारी दी।हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मवेशियों की मौत हुई थी तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को तत्काल क्यों नहीं दी गई? क्या मौत के मामलों को छिपाया गया? यदि ऐसा है तो यह गंभीर लापरवाही के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन का मामला भी हो सकता है।अब यह पूरा विषय जांच का अहम बिंदु बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समाचार प्रकाशित होने से पहले तक गौशाला में चारे की गुणवत्ता, साफ-सफाई और मवेशियों की देखभाल को लेकर गंभीर शिकायतें थीं,लेकिन जांच की सूचना मिलते ही सारी व्यवस्थाएं अचानक दुरुस्त दिखाई देने लगीं।इससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं और यह मांग उठ रही है कि मामले की जांच केवल वर्तमान स्थिति देखकर नहीं,बल्कि पूर्व की वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की जाए।

इस संबंध में जांच टीम के प्रभारी ओंकार तिवारी से उनका पक्ष जानने के लिए पत्रकार साथी द्वारा मोबाइल पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया,लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।ऐसे में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
क्या जांच से पहले सबूत मिटाने की कोशिश हुई, या फिर समाचार के बाद ही गौशाला की व्यवस्थाएं सुधरीं? इसका जवाब अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगा।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















