(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड में शिक्षा सत्र शुरू हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन कई स्कूलों में आज भी बच्चों को पर्याप्त भवन नसीब नहीं हो पाया है। प्राथमिक शाला फरसरा की तस्वीर शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की कहानी बयां कर रही है। यहां स्कूल भवन की कमी के चलते पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई वन विभाग के कमरे में, तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई स्कूल के अतिरिक्त भवन में, जबकि पांचवीं कक्षा के बच्चे सरपंच के केबिन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
पंचायत भवन में पढ़ते बच्चे
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल भवन का निर्माण पिछले करीब एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन अब तक भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि नन्हे बच्चों को अपनी नियमित पढ़ाई के लिए कभी इस कमरे तो कभी उस कमरे का सहारा लेना पड़ रहा है।

एक स्कूल, तीन जगहों पर लग रही कक्षाएं
फरसरा प्राथमिक शाला में पर्याप्त भवन नहीं होने के कारण बच्चों की कक्षाएं अलग-अलग स्थानों पर संचालित की जा रही हैं। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे वन विभाग के कमरे में पढ़ रहे हैं, तीसरी और चौथी के बच्चों के लिए स्कूल का अतिरिक्त भवन इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं पांचवीं के विद्यार्थियों के लिए सरपंच का केबिन ही अस्थायी कक्षा बन गया है।
ऐसे में सहज ही सवाल उठता है कि आखिर जिन बच्चों के लिए सरकार स्कूल भवन और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के दावे करती है, उन्हें उधारी के कमरों में कब तक पढ़ना पड़ेगा?

भवन निर्माण में धीरे गति
एक साल से निर्माणाधीन भवन, जिम्मेदार कौन?
ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल भवन का निर्माण लंबे समय से जारी है। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन भवन का काम पूरा नहीं होने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश के इस मौसम में अलग-अलग जगहों पर कक्षाएं संचालित करना बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बना हुआ है।
बच्चों का भविष्य उधारी के कमरों में!
स्कूल एक साल से निर्माणाधीन भवन, जिम्मेदार कौन? स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहालों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए शासन स्तर पर शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन फरसरा की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। जब पांचवीं कक्षा के बच्चों को ही अपनी पढ़ाई के लिए सरपंच के केबिन का सहारा लेना पड़े, तो गांव की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस मामले में प्रधान पाठक ने क्या कहा…..
अब ग्रामीणों और पालकों की मांग है कि अधूरे स्कूल भवन का निर्माण जल्द पूरा कराकर बच्चों को उनका अपना स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें अलग-अलग कमरों में भटककर पढ़ाई करने की मजबूरी से निजात मिल सके।फरसरा के बच्चों को आखिर अपना स्कूल भवन कब मिलेगा? इसका जवाब जिम्मेदार विभाग को देना होगा।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















