(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए पशुओं के संतुलित आहार में हरे चारे की महत्वपूर्ण भूमिका है। दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों की उत्पादन लागत कम करने के उद्देश्य से गरियाबंद विकासखंड में हरा चारा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व विभाग की महत्वाकांक्षी डेयरी उद्यमिता विकास योजना के माध्यम से शहर और आसपास के क्षेत्रों में लघु डेयरी इकाइयों की संख्या में वृद्धि हुई। इससे लोगों को स्थानीय स्तर पर शुद्ध एवं ताजा दूध उपलब्ध होने लगा और अन्य पशुपालकों का रुझान भी डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ा है। हालांकि डेयरी संचालन में पशुओं के दाना एवं अन्य आहार पर होने वाला खर्च पशुपालकों की आय का बड़ा हिस्सा ले जाता है। ऐसे में दाना खरीद पर होने वाले आर्थिक दबाव को कम करने के लिए प्रत्येक डेयरी फार्मर के लिए अपने स्तर पर हरा चारा उत्पादन करना बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

गरियाबंद में रेड नेपियर की शुरुआत
वर्तमान में गरियाबंद के आसपास के डेयरी पशुपालकों ने विभाग की तकनीकी सहायता से अत्याधुनिक रेड नेपियर चारे की खेती शुरू की है। यह चारा पौष्टिकता के साथ पशुओं के लिए बेहतर आहार विकल्प माना जा रहा है। इसमें लगभग 20 से 22 प्रतिशत तक प्रोटीन होने की जानकारी दी गई है तथा इसकी मिठास गन्ने जैसी बताई जाती है।
रेड नेपियर की रोपण सामग्री ओडिशा के संबलपुर जिले स्थित सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म से मंगाई गई है। विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में पशुपालकों द्वारा इसे अपनाया जाना क्षेत्र में हरा चारा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मक्का-नेपियर हाइब्रिड चारे पर भी प्रयोग
इसके अलावा पशु चिकित्सालय गरियाबंद तथा कुछ अन्य पशुपालकों द्वारा मक्का और नेपियर के क्रॉस से तैयार हाइब्रिड चारे की फसल भी वर्तमान में बीज उत्पादन के उद्देश्य से लगाई गई है। इस तरह के प्रयोग से स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चारा एवं रोपण सामग्री विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

विभाग के अनुसार, गरियाबंद विकासखंड में किया जा रहा यह नवाचार सस्टेनेबल डेयरी फार्मिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय स्तर पर हरे चारे की उपलब्धता बढ़ने से पशुपालकों को बाजार से महंगा दाना खरीदने पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे डेयरी संचालन की लागत घटने और पशुपालकों की आय में सुधार की संभावना है।
हरा चारा उपलब्ध होने से पशुपालकों को बाहर से महंगा दाना कम खरीदना पड़ेगा। इससे पशुओं के चारे पर होने वाला खर्च कम होगा और डेयरी पशुपालकों को अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही, पशुओं को पौष्टिक आहार मिलने से दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments











