(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। ग्राम जंगल धवलपुर के आश्रित गांव जरण्डीह के ग्रामीण वर्षों से बाकड़ी नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। पुल के अभाव में ग्रामीणों को बारिश के दिनों में ट्यूब के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद यह रास्ता ग्रामीणों के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
बाकड़ी नदी पर पुल नहीं होने से बारिश के मौसम में जरण्डीह के ग्रामीणों के सामने आवागमन की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ती है। नदी पार कर स्कूल जाना जोखिम भरा होने के कारण कई परिजन अपने बच्चों को धवलपुर और आसपास के गांवों में रिश्तेदारों के यहां अस्थायी रूप से रखकर पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था करते हैं।

2014 में नदी में डूबने से छात्र की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2014 में इसी बाकड़ी नदी में डूबने से एक छात्र की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद नदी पर सुरक्षित आवागमन के लिए अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है। हर साल बारिश के दौरान ग्रामीणों को उसी खतरे का सामना करना पड़ता है।
तीन साल पहले मिली थी करीब 6 करोड़ की मंजूरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बाकड़ी नदी पर पुल निर्माण के लिए करीब 6 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। बताया जा रहा है कि पुल निर्माण के लिए सर्वे का काम भी पूरा किया जा चुका था, लेकिन इसके बाद भी धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

ट्यूब बना सहारा, प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग
पुल नहीं बनने के कारण ग्रामीणों के लिए नदी पार करने का एकमात्र सहारा ट्यूब और अन्य अस्थायी साधन ही रह गए हैं। तेज बहाव के बीच इस तरह नदी पार करना कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से बाकड़ी नदी पर स्वीकृत पुल का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से जरण्डीह सहित आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और स्कूली बच्चों को भी पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments











