(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। अन्नदाता की चार महीने की अथक तपस्या पर मौसम की बेरहम मार ने पानी फेर दिया है। अर्णव तूफान के प्रभाव से हुई तेज बारिश और प्रतिकूल मौसम ने गरियाबंद जिले में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक लहलहाती धान की बालियां किसानों की खुशहाली की उम्मीद जगा रही थीं, वहां अब खेतों में बिछी फसल और बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा है।

किसानों ने महंगे खाद-बीज, कीटनाशक, कृषि मजदूरी और सिंचाई पर अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तथा कर्ज की रकम लगाकर चार महीने तक दिन-रात पसीना बहाया था। बेहतर पैदावार और अच्छी आमदनी की उम्मीद लगाए बैठे अन्नदाताओं के सपनों पर अर्णव तूफान और बेमौसम बारिश ने गहरा आघात पहुंचाया है। खेतों में गिरी धान की फसल के कारण उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ धान के अंकुरित होने तथा आर्थिक नुकसान बढ़ने की आशंका है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति की मांग
प्राकृतिक आपदा की इस मार ने किसानों को आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ऐसे कठिन समय में शासन-प्रशासन को केवल औपचारिकता निभाने के बजाय संवेदनशीलता के साथ तत्काल राहत पहुंचाने की पहल करनी चाहिए। प्रभावित गांवों और खेतों का राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम से पारदर्शी सर्वे कराया जाए। वास्तविक फसल क्षति का आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति, उचित मुआवजा तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि का लाभ दिलाया जाए।

इसके साथ ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो, ताकि किसानों को राहत के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
आखिर अन्नदाता की मेहनत और उसकी पूंजी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? जब किसान चार महीने तक अपनी पूरी ताकत लगाकर देश और प्रदेश के लिए अन्न पैदा करता है, तब प्राकृतिक आपदा में उसकी फसल बर्बाद होने पर उसे बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार से अपेक्षा है कि इस संकट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पैकेज और पर्याप्त क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करे।
क्योंकि खेत में बर्बाद हुई फसल केवल किसान की उपज नहीं, बल्कि उसके परिवार की आजीविका, बच्चों का भविष्य और पूरे साल की आर्थिक उम्मीद होती है। अन्नदाता को आश्वासन नहीं, अब वास्तविक राहत और न्यायसंगत मुआवजे की दरकार है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments











