गरियाबंद। अवैध अतिक्रमण पर वर्षों से धीरे-धीरे सोचते हुए आखिरकार प्रशासन की नींद खुल गई और पाण्डुका ग्राम पंचायत में सोमवार का दिन आधिकारिक बुलडोजर महोत्सव बन गया। लंबे समय से बिना अनुमति खड़े 17 मकानों को प्रशासन ने वैधानिक रूप से अवैध घोषित किया और तकनीकी रूप से जमीन से बराबरी पर ला दिया।
सूत्रों के अनुसार, कब्जाधारियों को चार बार नोटिस भेजे गए थे। शायद नोटिस पढ़ने के लिए समय नहीं मिला होगा—या फिर सबने सोचा होगा कि नोटिस तो वैसे भी सिर्फ फाइलें मोटी करने के लिए भेजे जाते हैं। लेकिन इस बार प्रशासन ने नोटिसों को सजावट का सामान न मानते हुए गंभीरता से लिया और बुलडोजर को भी पत्राचार में शामिल कर लिया।

सुबह-सुबह जब ग्रामीण उठकर चाय बना रहे थे, तभी प्रशासनिक टीम, पुलिस बल और भारी-भरकम बुलडोजर गांव में ऐसे दाखिल हुए जैसे कोई मेहमान अचानक बिना बताए घर आ जाए—पर फर्क इतना कि यहाँ चाय-नाश्ते की जगह मकान का नाश्ता हो गया।
राजिम तहसीलदार, पटवारी, आरआई और पुलिस की टीम मौके पर मौजूद रही, ताकि कोई यह न कह सके कि कार्रवाई बिना दर्शकों के की गई। ग्रामीण भी बड़ी संख्या में जुटे, कुछ मोबाइल कैमरा लेकर “बुलडोजर लाइव शो” देखने, तो कुछ प्रभावित लोग “थोड़ा और समय” मांगने… जो अब बीते समय में बदल चुका था।
कुछ ग्रामीणों ने कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया, प्रशासन को ऐसे ही सख्त होना चाहिए।” वहीं प्रभावितों ने कहा, “कम से कम एक आखिरी नोटिस और दे देते।” पर अधिकारियों ने साफ कह दिया कि नोटिस चार थे, पांचवां भेजने से ज्यादा आसान मकान गिराना लगा।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















