गरियाबंद । सरकारी समर्थन मूल्य पर सुगम और शांतिपूर्ण धान खरीदी को प्रभावित करने वाले अवैध कारोबारियों ने इस बार प्रशासन को रातभर की जिम करवा दी। ओडिशा सीमा से उरमाल चेकपोस्ट पार कर 1109 वाहन तेज रफ्तार में क्या निकल रहा था, मानो NASCAR रेस जीतने निकला हो। पर किस्मत का चक्का ऐसा घूमा कि उसे रोकने खड़ी थी—मैनपुर एसडीएम डॉ. तुलसीदास मरकाम की सुपर-टीम, जिसमें तहसीलदारों और मण्डी निरीक्षक का ऐसा संयुक्त ऑपरेशन दिखा मानो कोई एंटी-धान स्पेशल फोर्स गठित कर दी गई हो।

टीम ने वाहन में भरे अवैध धान और पास के गोदाम में जमा माल को जोड़कर जब हिसाब लगाया, तो पाया कि भाईसाहब 4 सौ से अधिक बोरी ऐसे रखे थे जैसे घर में त्योहार के लिए लड्डू के डिब्बे।
वहीं दूसरी तरफ, जनपद सदस्य क्रमांक 11 परमेश्वर मालू का नाम जैसे ही सामने आया, विरोध ऐसे फूटा मानो IPL में DRS गलत दे दिया गया हो। वाहन की चाबी देने से लेकर सहयोग तक हर चीज़ में इतना संघर्ष हुआ कि पूरा एक प्रशासनिक महाभारत 15 घंटे तक चलता रहा।

टीम की हालत देखकर लग रहा था कि 15 घंटे की ये कार्रवाई हो न हो, पर DP तो पक्की बदलनी पड़ेगी—“ऑफिशियलली स्लीप-डिप्राइव्ड लेकिन डिटरमाइंड” टाइप।
इधर उरमाल चेकपोस्ट में तैनात केकराजोर कोटवार धनेश्वर दुर्गा पर उठते सवाल देखकर लोग सोच रहे—
“ये धान गया कैसे? उड़कर? या चेकपोस्ट ने ‘आज फ्री पास डे’ घोषित कर दिया था?”
उधर अमलीपदर तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने सोचा—
“जब निकले ही हैं, तो एक काम और कर लेते हैं।”
और धान कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने बुलडोजर भी चला दिया।
देखते ही देखते पूरा इलाका ‘धान टू बुलडोजर टूर’ का हिस्सा बन गया।
कुल मिलाकर, इस धान ड्रामा ने साबित कर दिया—
धान चाहे अवैध हो या वैध, प्रशासन को दौड़ाने की क्षमता रखता है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















