गरियाबंद। रेंज स्तरीय ‘ऑपरेशन निश्चय’ के तहत पुलिस ने जिस तेजी से 47 फरार वारंटियों को धर दबोचा है, उसे देखकर इलाके के बची-खुची वारंटी भी अब गायब होने का निश्चय बदलकर सरेंडर होने का निश्चय करने पर मजबूर हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देश मिलते ही समूचा पुलिस महकमा एकदम ऐसे एक्टिव हो गया, जैसे महीनों बाद किसी को वेतन की याद दिलाई गई हो। थाना प्रभारियों को भी अचानक एहसास हुआ कि वारंट केवल अलमारी सजाने की चीज नहीं है, असल में उनकी तामिली भी नाम की कोई प्रक्रिया होती है।

अभियान के दौरान
थाना छुरा ने 2 स्थायी + 1 गिरफ्तारी वारंट पूरा कर यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ FIR लिखने में ही नहीं, पकड़ने में भी सक्षम हैं।
फ़िंगेश्वर ने 1 स्थायी और 7 गिरफ्तारी वारंट पकड़कर वारंटी पकड़-प्रतियोगिता में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।
राजिम ने 11 वारंट पकड़कर मानो कह दिया—”हमसे हो पाएगा!”
देवभोग पुलिस ने तो 14 वारंट पकड़कर सीधे-सीधे ‘बिग बोस’ टाइप परफॉर्मेंस दिया।

अंततः कुल 47 वारंटियों को पकड़कर माननीय न्यायालय में उस तरह पेश किया गया, जैसे स्कूल में देर से पकड़े गए बच्चे प्रिंसिपल के सामने पेश होते हैं—नीचे नजर, ऊपर खुदा।
सूत्र बताते हैं कि इस सफलता के बाद पुलिस विभाग अब “ऑपरेशन निश्चय–पार्ट 2” चलाने की सोच रहा है, जिसमें लक्ष्य होगा—
“जो वारंटी पकड़ में न आए, उसे भी पकड़ में लाना है… चाहे वह खुद भी न जानता हो कि वह वारंटी है!”
बहरहाल, जनता राहत महसूस कर रही है और वारंटी वर्ग यह सोचकर दहशत में है कि कहीं पुलिस का यह निश्चय स्थायी न हो जाए।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















