गरियाबंद। 10 दिनों में 6वीं बड़ी कार्रवाई करते हुए गरियाबंद पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि “भाई, हमसे जो टकराएगा… सीधा न्यायालय जाएगा।”
इस बार पुलिस के शिकंजे में वे पांच महानुभाव आए हैं, जिनकी मोटरसाइकिलें शायद पहली बार इतनी इज्ज़त से रुकी होंगी। उड़ीसा से राजिम की ओर दो पल्सर पर बैठकर 34 किलो 200 ग्राम गांजा लेकर आ रहे ये लोग सोच रहे होंगे—“मेन रोड से चलेंगे तो कौन देखेगा?” पर किस्मत ने कहा—“जोरा तालाब के पास कैमरा ऑन!”

मोटरसाइकिल पर बैग और बैग में माल — पुलिस ने कहा, ‘सब बाहर निकालो’
चेकिंग में पता चला कि पीछे बैठे सज्जनों ने दो-दो बैग को ऐसे पकड़ा हुआ था जैसे शादी में लाए जा रहे गिफ्ट हों। लेकिन अंदर कीमती 30 किलो 200 ग्राम अवैध गांजा निकला। पुलिस ने तुरंत गणित लगाया—15 लाख 20 हजार का माल + 1 लाख 70 हजार की दोनों पल्सर + मोबाइल = कुल 18 लाख 90 हजार का “सुंदर पैकेज”।
कहानी में ट्विस्ट—रायपुर छोड़ने निकले थे, पुलिस सीधे खरियार रोड छोड़ आई!

पूछताछ में मालूम हुआ कि सारा माल उड़ीसा के प्रेम उर्फ “बेब्बे” से खरीदा गया था।
पुलिस ने कहा—“ठीक है भाई, जाते क्यों हो? हम खुद चलकर मिल लेते हैं।”
फटाफट एण्ड टू एण्ड कार्रवाई करते हुए टीम खरियार रोड पहुंची और बेब्बे को भी 4 किलो अवैध माल के साथ उठाकर ले आई।
10 दिनों में लगभग 1 क्विंटल 27 किलो गांजा जब्त—तस्करों की नींद, पुलिस का प्रेशर बढ़ा
रेंज स्तरीय ऑपरेशन निश्चय में पुलिस ने गरियाबंद जिले को तस्करों के लिए “नो एंट्री ज़ोन” जैसा माहौल बना दिया है।
तस्करों की हालत अब ऐसी है कि वे गाड़ी में बैठे-बैठे गूगल मैप में ‘नो-पुलिस रूट’ खोजते हैं, पर हर रास्ता आखिर में लिखता है—
“रोककर चेकिंग की जाएगी।”
पकड़े गए पाँचों महानुभाव:
सबके पते और उम्र देखकर लगता है कि यंग जनरेशन ने नया स्टार्टअप मॉडल शुरू किया था — “गांजा ऑन व्हील्स”,
लेकिन पुलिस ने लॉन्चिंग के पहले ही स्टार्टअप बंद कर दिया।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















