(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी क्या शुरू हुई, वैसे ही धान ने भी पंख लगा लिए। खेत से मंडी की जगह अब धान सीधे ट्रक, मेटाडोर, ट्रैक्टर और बोलेरो में बैठकर “सीमा दर्शन” पर निकल पड़ा। लेकिन अफसोस! इस बार धान की यह यात्रा ज्यादा दूर नहीं जा सकी, क्योंकि गरियाबंद पुलिस पहले से ही “धान विशेषज्ञ” बनकर बॉर्डर पर तैनात थी।
दिनांक 31.12.2025 को थाना देवभोग, अमलीपदर और इंदागांव पुलिस ने ऐसा संयुक्त ऑपरेशन चलाया कि धान बेचने वाले भी सोच में पड़ गए—“अब धान बेचें या पुलिस को ही सौंप दें?”
एक ही दिन में 06 अलग-अलग कार्यवाहियों के दौरान कुल 1515 कट्टा (606 क्विंटल) धान, जिसकी कीमत 18 लाख 78 हजार 600 रुपये बताई जा रही है, पुलिस की गोद में आ गिरा।

धान की सवारी और पुलिस की सवारी—आमने-सामने
कहते हैं धान शांत फसल है, लेकिन जब वह अवैध तरीके से ट्रकों में भरकर बॉर्डर पार करने लगे तो पुलिस को भी अलर्ट होना पड़ता है। मुखबिरों की कृपा से देवभोग पुलिस को खबर मिली कि ओडिशा से धान “घूमने” आ रहा है। बस फिर क्या था—पुलिस टीम निकली और धान की यात्रा यहीं समाप्त।
ट्रक CG-08-L-3919: 400 कट्टा धान
407 मेटाडोर (बिना नंबर प्लेट): 100 कट्टा
ट्रैक्टर CG-23-H-0697: 60 कट्टा
इधर इंदागांव में भी धान ने हार नहीं मानी, लेकिन पुलिस ने वहां भी स्वागत कर लिया—
ट्रक CG-04-J-8761: 405 कट्टा
ट्रक CG-07-AU-2668: 500 कट्टा
और आखिर में अमलीपदर से निकली बोलेरो पिकअप भी ज्यादा तेज नहीं निकल सकी—
बोलेरो CG-11-A-3978: 50 कट्टा धान
कुल मिलाकर, 06 वाहन और 1515 कट्टा धान—यानि धान का पूरा काफिला पुलिस चौकी पहुंच गया।

एक माह, 22 दिन और धान का हिसाब-किताब
गरियाबंद पुलिस ने सिर्फ एक दिन का ही नहीं, बल्कि पूरे एक माह 22 दिवस का हिसाब खोल दिया। इस दौरान
52 चारपहिया वाहन,
04 लावारिस प्रकरण,
कुल 56 मामलों में
6778 कट्टा (2911.5 क्विंटल) धान
जिसकी कीमत 90 लाख 25 हजार 650 रुपये
जब्त किया गया।
यानि अगर धान बोल सकता, तो शायद कहता—“भैया, इस जिले में अवैध जाना मना है।”
नियम किताब में, धान सड़क पर!
छत्तीसगढ़ शासन साफ कह चुका है कि धान खरीदी सिर्फ पंजीकृत किसानों से और तय केंद्रों में ही होगी। लेकिन लगता है कुछ लोग इस नियम को सिर्फ किताब तक सीमित रखना चाहते हैं। पुलिस ने जब कागजात मांगे तो जवाब मिला—“धान है, कागज नहीं।”
पुलिस का संदेश (और धान का भी)
गरियाबंद पुलिस का साफ संदेश है—
“धान खेत में अच्छा लगता है, ट्रक में नहीं।”
अवैध धान परिवहन और बिक्री के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अब देखना यह है कि धान अगली बार ट्रक में आएगा या सीधे खरीदी केंद्र पहुंचेगा।
फिलहाल तो गरियाबंद में धान समझ गया है—यहां बॉर्डर पार करना आसान नहीं!

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















