(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में कुछ शिकारियों ने सोचा होगा कि जंगल में घुसकर चुपचाप वन्यजीवों का शिकार कर लिया जाएगा और किसी को भनक भी नहीं लगेगी। लेकिन उनका यह “जंगल अभियान” ज्यादा देर नहीं चला। एंटी पोचिंग टीम ने ऐसी घेराबंदी की कि शिकारी सीधे जंगल से निकलकर जेल की सलाखों तक पहुंच गए।
दरअसल, इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर क्षेत्र के पीपलखूंटा बीट कक्ष क्रमांक 1204 में ओडिशा के चार लोग तीर-धनुष और गुलेल के साथ शिकार करने पहुंचे थे। इनका निशाना जंगल के दुर्लभ वन्यजीव थे—गुलेल से उड़न गिलहरी और तीर-धनुष से कोटरी का शिकार किया गया। लेकिन शायद उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि जंगल में सिर्फ जानवर ही नहीं, वन विभाग की नजर भी उतनी ही तेज रहती है।

एंटी पोचिंग टीम ने मौके पर दबिश देकर चारों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में चमरु, मनीराम, गुड्डू और लखमु शामिल हैं, जो ओडिशा के नवरंगपुर जिले के ग्राम अछला के रहने वाले हैं। इनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और देवभोग न्यायालय में पेश करने के बाद 14 दिन के लिए उप जेल गरियाबंद भेज दिया गया।
पूछताछ में मामला और दिलचस्प निकला। आरोपियों की निशानदेही पर ग्राम कोलिहाडबरी (ओडिशा) के हिरासिंग नामक व्यक्ति के पास से एक भरमार बंदूक भी बरामद कर ली गई। वहीं फरार आरोपी गुड्डू के घर से अज्ञात वन्यप्राणी (बयान के आधार पर कोटरी) का कच्चा मांस भी जब्त किया गया।
हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस पूरे शिकार कांड में अभी पांच और साथी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है। यानी शिकारियों का यह “जंगल मिशन” अब धीरे-धीरे “कानूनी मिशन” में बदलता जा रहा है।
वन विभाग की टीम ने साफ संदेश भी दे दिया है—टाइगर रिज़र्व में शिकार करने का सपना देखने वाले लोग 50 किलोमीटर दूर ही रहें, वरना जंगल की सैर करते-करते सीधे जेल की सैर भी करनी पड़ सकती है।
गौरतलब है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व की टीम ओडिशा के नुआपाड़ा, नवरंगपुर, कालाहांडी, बोलांगीर और रायगढ़ा जिलों तक जाकर शिकारियों और वन्यजीव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
इस पूरी कार्रवाई में सहायक संचालक उदंती मैनपुर, परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव सुशील कुमार सागर, दक्षिण उदंती के वन परिक्षेत्र अधिकारी चन्द्रबली ध्रुव, वनपाल भूपेन्द्र कुमार सोनी, वनरक्षक जय ललिता ध्रुव, पामेश्वरी, विरेन्द्र कुमार ध्रुव, टकेश्वर देवागन, रुस्तम यादव सहित कई वन कर्मचारियों की टीम शामिल रही। साथ ही ओडिशा के नवरंगपुर वनमंडल के एसीएफ सुभाष खुटिया और उनकी टीम ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















