(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। ओडिशा सीमा से लगे साहेबिनकछार गांव में इन दिनों सागौन लकड़ी को छिपाने के ऐसे-ऐसे तरीके सामने आए हैं कि बड़े-बड़े खुफिया एजेंसियां भी हैरान रह जाएं। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पता चला कि कुछ लोगों ने करोड़पति बनने के सपने में जंगल का खजाना घरों में जमा कर रखा था। लेकिन जब कार्रवाई की आहट मिली तो सागौन के पल्ले तालाबों में गोते लगाने लगे और कुछ जमीन के नीचे समाधि ले बैठे।
वन विभाग की टीम जब गांव पहुंची तो किसी के बाड़ी में गड्ढा खोदकर लकड़ी दफन मिली, तो कहीं डबरी और नदी किनारे छिपाकर रखी गई थी। लगता है आरोपियों को भरोसा था कि सागौन भी आलू-प्याज की तरह जमीन में दबाकर सुरक्षित रखा जा सकता है। मगर उनकी यह उम्मीद डॉग स्क्वाड की सदस्य टीना ने कुछ ही देर में धराशायी कर दी।

कार्रवाई में करीब 4.56 घनमीटर सागौन और बीजा लकड़ी, पेट्रोल चलित आरा मशीन, बड़े हाथ आरे तथा वन्यप्राणी साही के अवयव और शिकार में उपयोग होने वाले फंदे बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ घरों में सागौन से बने शानदार सोफा सेट मौजूद हैं, जिससे वन विभाग को शक है कि जंगल की लकड़ी सीधे फर्नीचर उद्योग में तब्दील हो रही थी।
वन विभाग को ओडिशा के तस्करों से भी तार जुड़े होने के संकेत मिले हैं। यानी सीमा पार की दोस्ती सिर्फ चाय-पानी तक सीमित नहीं थी, बल्कि सागौन के कारोबार तक पहुंच चुकी थी।

संयुक्त कार्रवाई में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ, जबकि सात अन्य फरार बताए जा रहे हैं। अब गांव में चर्चा इस बात की है कि जंगल की लकड़ी छिपाने के लिए तालाब और गड्ढे तो चुन लिए गए, लेकिन यह भूल गए कि विभाग के पास टीना भी है, जो जमीन के नीचे दबे राज भी सूंघ लेती है।
फिलहाल वन विभाग आगे की जांच में जुटा है और साहेबिनकछार में छिपे “लकड़ी साम्राज्य” की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। गांव वालों का कहना है कि अब तालाब में मछली कम और सागौन ज्यादा मिलने की संभावना थी, लेकिन विभाग ने समय रहते यह भ्रम भी दूर कर दिया।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















