मैनपुर/गरियाबंद। गरियाबंद जिले के अंतिम छोर और ओड़िशा सीमा से सटे मैनपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत गौरगांव के आश्रित ग्राम झोलाराव में खाद चोरी के आरोप के बाद ऐसा ‘अनूठा फैसला’ सामने आया है, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। यहां ग्रामीणों ने चोरी के आरोप में पकड़े गए दो युवकों को पुलिस के हवाले करने के बजाय मौके पर ही ऐसी ‘सजा’ सुना दी, जिसमें कानून की किताब की जगह ढोल-नगाड़े और अदालत की जगह गांव की भीड़ नजर आई।
मामला गांव के ही एक किसान के घर से यूरिया खाद की दो बोरियां चोरी होने का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, चोरी के आरोप में प्रभु और कृष्णा नामक दो युवकों को कथित तौर पर खाद की बोरियों के साथ पकड़ लिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों से पूछताछ की और मामला गांव में फैलते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई।
फिर क्या था… पुलिस को सूचना देने से पहले ही गांव में ‘तुरंत न्याय’ का कार्यक्रम शुरू हो गया।

ग्रामीणों ने दोनों युवकों के कंधों पर कथित रूप से चोरी की गई यूरिया की बोरियां रस्सी से बांध दीं। इसके बाद ढोल-नगाड़े और बाजे-गाजे के साथ दोनों को पूरे गांव की बस्ती में पैदल घुमाया गया। यानी जिस खाद को चुपचाप ठिकाने लगाने की कथित कोशिश थी, वही खाद आरोपियों की पहचान बनकर पूरे गांव में उनके कंधों पर घूमती नजर आई।
खाद की बोरी बनी ‘सबूत’ और ढोल बना गांव का साउंड सिस्टम!
जुलूस के दौरान गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी घरों से बाहर निकल आए। किसी के लिए यह चोरी के खिलाफ ग्रामीणों की सख्ती थी तो किसी के लिए सवाल यह कि आखिर गांव में पुलिस, कानून और न्याय की व्यवस्था होने के बावजूद ‘फैसला ऑन द स्पॉट’ की जरूरत क्यों पड़ गई?
घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होने की बात सामने आ रही है। वीडियो में कथित तौर पर दोनों युवकों को कंधे पर खाद की बोरी बांधे और ग्रामीणों के बीच से गुजरते हुए देखा जा सकता है।
चोरी रोकने की कोशिश या कानून को बायपास करने का तरीका?
ग्रामीणों का संदेश साफ नजर आया—खाद चोरी करोगे तो यूरिया की बोरी कंधे पर लेकर पूरे गांव का दर्शन करना पड़ेगा। लेकिन सवाल यह भी है कि अपराध के आरोप में पकड़े गए किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से दंडित करने का अधिकार आखिर किसके पास है?
कानून व्यवस्था में किसी व्यक्ति पर चोरी का आरोप लगना और चोरी साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना देकर जांच और कानूनी कार्रवाई कराना ही उचित प्रक्रिया मानी जाती है। ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति को दंडित करना या उसका जुलूस निकालना खुद एक अलग कानूनी सवाल खड़ा कर सकता है।

अब असली फैसला पुलिस की जांच करेगी
फिलहाल प्रभु और कृष्णा पर लगे चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों द्वारा दोनों युवकों को यूरिया की बोरी बांधकर गांव में घुमाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला और भी चर्चा में है।
अब देखना यह है कि खाद चोरी की कहानी में पुलिस की जांच क्या सच सामने लाती है और गांव के ‘ढोल वाले न्याय’ पर कानून की नजर कब पड़ती है।
एक बात जरूर है—यूरिया की बोरी खाद के लिए थी, लेकिन झोलाराव में वह एक दिन के लिए ‘इंसाफ की पहचान’ जरूर बन गई।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments











