(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद । उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित ग्राम जुगाड़ एवं देवझरअमली के ग्रामीणों द्वारा दिए गए स्वैच्छिक विस्थापन के प्रस्ताव तथा राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली की गाइडलाइन के प्रावधानों के अनुपालन में जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आज कलेक्टर सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में स्वैच्छिक विस्थापन एवं पुनर्वास की आगामी प्रक्रिया, ग्रामीणों के सत्यापन, संयुक्त सर्वे, दावा-आपत्ति तथा पुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के विकास सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर सह अध्यक्ष श्री रणबीर शर्मा ने की। इस अवसर पर डीएफओ गरियाबंद श्री मयंक पांडे, उपनिदेशक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व श्री वरुण जैन, जिला पंचायत सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर, एसडीएम गरियाबंद, समिति से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारी तथा ग्राम जुगाड़ एवं देवझरअमली के इच्छुक ग्रामीण उपस्थित रहे।

पूरी तरह स्वैच्छिक होगी विस्थापन की प्रक्रिया –
बैठक में कलेक्टर श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि ग्राम जुगाड़ एवं देवझरअमली का विस्थापन पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विस्थापन एवं पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया ग्रामीणों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता, पारदर्शिता और निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप पूरी की जाए। कलेक्टर ने आगामी 45 दिनों के भीतर विस्थापन के इच्छुक ग्रामीणों का सत्यापन करने के निर्देश दिए। इस दौरान पात्र एवं अपात्र ग्रामीणों की अंतिम सूची तैयार कर जारी की जाएगी। निर्धारित 45 दिवस की समय-सीमा में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी, ताकि पात्र हितग्राहियों का निर्धारण कर आगे की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से की जा सके।
नवीन पुनर्वास भूमि का होगा संयुक्त सर्वे –
पुनर्वास के लिए प्रस्तावित नवीन वन भूमि का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद वनमंडल एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त सर्वे किया जाएगा। कलेक्टर ने सर्वे कार्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि फॉरेस्ट क्लीयरेंस से संबंधित प्रकरण को राज्य शासन एवं भारत सरकार को समय पर भेजा जा सके। साथ ही विस्थापन पैकेज के लिए आवश्यक बजट की मांग भी समय पर प्रेषित की जा सके।
पुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के विकास पर जोर –
समिति ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास केवल परिवारों के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नए पुनर्वास स्थल पर आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विकास भी सुनिश्चित किया जाएगा। इसके तहत सड़क, बिजली, स्कूल, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं, सिंचाई तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना को विभागीय अभिसरण के माध्यम से विकसित करने पर जोर दिया गया।संयुक्त सर्वे एवं सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए मैदानी स्तर पर टीम गठित की गई है। इसमें पटवारी, रोजगार सहायक, ग्राम सचिव एवं वन अमला शामिल रहेंगे। मैदानी स्तर पर सर्वे एवं सत्यापन के पश्चात प्रक्रिया का विधिवत सत्यापन एसडीएम मैनपुर, एसडीएम गरियाबंद तथा वन विभाग के एसडीओ एवं परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

इन्फॉर्म्ड कंसेंट के तहत ग्रामीणों को कराया गया विस्थापित गांवों का भ्रमण –
विस्थापन प्रक्रिया को ग्रामीणों के लिए पारदर्शी एवं जानकारी पर आधारित बनाने के उद्देश्य से ‘इन्फॉर्म्ड कंसेंट’ के तहत ग्राम देवझरअमली एवं ग्राम जुगाड़ के इच्छुक ग्रामीणों को बारनवापारा अभ्यारण्य से लगभग 10 वर्ष पूर्व विस्थापित किए गए तीन ग्रामों का भ्रमण भी कराया जा चुका है। भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने पूर्व में विस्थापित परिवारों से चर्चा कर उनके अनुभवों, पुनर्वास के बाद की स्थिति तथा उपलब्ध सुविधाओं को करीब से समझा। बैठक में राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुरूप स्वैच्छिक पुनर्वास के विकल्प-1 एवं विकल्प-2 पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विकल्प-1 के अंतर्गत पात्र परिवार यूनिट को 15 लाख रुपये की सहायता दिए जाने के प्रावधान पर चर्चा हुई। वहीं विकल्प-2 के अंतर्गत पात्र परिवार यूनिट को 2 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा 0.3 हेक्टेयर आवासीय-बाड़ी भूमि उपलब्ध कराने के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के विकास के माध्यम से पुनर्वास किए जाने की व्यवस्था पर विचार किया गया। बैठक में परिवार यूनिट की पात्रता के आकलन, वयस्क पुत्र एवं पुत्री, दिव्यांग व्यक्ति, विधवा एवं तलाकशुदा महिला सहित अन्य पात्र श्रेणियों के संबंध में यूनिट निर्धारण की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पुनर्वास के लिए चयनित वन भूमि को नियमानुसार डीनोटिफाई कर राजस्व भूमि में परिवर्तित किए जाने से संबंधित भारत सरकार के प्रावधानों की जानकारी भी दी गई। इसका उद्देश्य पुनर्वास के बाद ग्रामीणों को अपने आवास एवं अन्य अनुमत निर्माण कार्यों के लिए वन स्वीकृति से संबंधित अनावश्यक प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना है।
परियोजना आधारित तैयार होगी पुनर्वास योजना –
बैठक में प्रत्येक पुनर्वास परियोजना के लिए विस्तृत पुनर्स्थापन प्लान तैयार किए जाने पर भी चर्चा हुई। इसमें पुनर्वास योजना, पात्र परिवारों का विवरण, अधिकारों के निपटारे तथा आवास निर्माण के साथ आंगनबाड़ी, सिंचाई, सड़क, कुआं, जल टंकी, हैंडपंप, सीमांकन एवं समतलीकरण, स्कूल, सामुदायिक केंद्र और जलापूर्ति सहित आवश्यक कार्यों का विस्तृत आकलन शामिल किया जाएगा। स्वैच्छिक पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत 17 सितंबर 2026 को कलेक्टर गरियाबंद एवं उप निदेशक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व द्वारा ग्राम जुगाड़ एवं देवझरअमली का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया गया था। इस दौरान ग्रामीणों की पुनर्वास से संबंधित चिंताओं, अपेक्षाओं एवं सुझावों को समझने का प्रयास किया गया।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments











