गरियाबंद। अमाड़ ग्राम पंचायत के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात के दिनों में यहां के लोगों की जिंदगी मुश्किलों में घिर जाती है। पुल–पुलिया नहीं होने के कारण गांव का संपर्क कट जाता है और बच्चों को स्कूल ले जाना, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है। यह क्षेत्र अति विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) क्षेत्र में आता है, इसके बावजूद समस्या पर प्रशासन ने अब तक ध्यान नहीं दिया है।
वर्षों से अधूरी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पुल–पुलिया निर्माण की मांग वे कई वर्षों से कर रहे हैं। बरसात आते ही यहां की सड़कें तालाब और नाले में बदल जाती हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों की व्यथा
ग्राम पंचायत के ग्रामीण रतिराम ओटी, गोपालसिंह नेमाम, पुस्तमसिंह मांझी, बलिराम सोरी सहित कई लोगों ने बताया कि बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं। बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते, तो दूसरी ओर मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में घंटों की मशक्कत करनी पड़ती है। महिलाओं में सुभद्राबाई नेमाम, रेवती नेताम और अन्य ग्रामीण महिलाओं ने भी प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई है।

सड़क से लेकर सदन तक उठी आवाज
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वे सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। बारिश के दिनों में स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो जाती है।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
🔴 सवाल यह है कि जब अति विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र के लोग भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, तब प्रशासन आखिर कब तक मौन रहेगा? क्या ग्रामीणों की जिंदगी हर बरसात में इसी तरह पानी में डूबती रहेगी?

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















