(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में इन दिनों अगर किसी चीज़ का सबसे ज़्यादा माइलेज मिल रहा है, तो वो है धान। फर्क बस इतना है कि कुछ लोग इसे खेत से मंडी तक ले जाते हैं और कुछ लोग… सीधा राज्य की सीमा लांघकर पुलिस के चेक पोस्ट तक। लेकिन इस बार “धान की उड़ान” ज्यादा दूर नहीं जा पाई, क्योंकि गरियाबंद पुलिस ने अवैध धान परिवहन के इस हाई-प्रोफाइल शो पर ऐसा ब्रेक मारा कि ट्रकों के साथ-साथ कारोबारियों की हिम्मत भी पंचर हो गई।
पिछले एक माह 15 दिनों से गरियाबंद पुलिस ने ऐसा अभियान चलाया है कि अवैध धान तस्करों में अब GPS से ज्यादा भगवान भरोसे सफर चल रहा है। नतीजा—
👉 2056.8 क्विंटल धान,
👉 कीमत करीब 63 लाख 91 हजार 890 रुपये,
👉 और कुल 41 प्रकरण—
सब पुलिस की झोली में।

तीन ट्रक, एक सपना… और पुलिस का चेक पोस्ट
दिनांक 24 दिसंबर 2025 को थाना जुगाड़ (पायलीखण) क्षेत्र में मुखबिर ने जो खबर दी, वो धान कारोबारियों के लिए किसी “ब्रेकिंग बैड” एपिसोड से कम नहीं थी। ओडिशा की ओर से आ रहे तीन ट्रक, जिनमें धान नहीं बल्कि “सपनों की फसल” भरी थी, गरियाबंद में दाखिल होने ही वाले थे।
लेकिन चेक पोस्ट पर पहले से तैनात पुलिस ने ऐसा स्वागत किया कि—
ट्रक CG-29-A-9002: 535 कट्टा
ट्रक CG-04-PV-2651: 360 कट्टा
ट्रक CG-04-JC-2711: 400 कट्टा
कुल मिलाकर 1295 कट्टा (582.75 क्विंटल) धान, जिसकी कीमत करीब 18 लाख रुपये बताई जा रही है, को “बिक्री से पहले ही विदाई” दे दी गई।
जब वैध कागजात मांगे गए तो जवाब वही पुराना निकला—
“कागज? कौन सा कागज?”
और यहीं से धान का सफर ट्रक से उतरकर थाने की ओर मुड़ गया।

एक माह, 15 दिन और 4662 कट्टा की कहानी
गरियाबंद पुलिस का यह अभियान कोई एक दिन का तमाशा नहीं, बल्कि लगातार चला आ रहा एक “धान विरोधी महाअभियान” है। थाना देवभोग, अमलीदर और छुरा पुलिस ने मिलकर अवैध धान परिवहन और बिक्री के ऐसे-ऐसे नमूने पकड़े कि तस्करों का भरोसा अब किस्मत से भी उठने लगा है।
अब तक—
37 चारपहिया वाहन,
04 लावारिस प्रकरण,
कुल 4662 कट्टा धान,
यानी 2056.8 क्विंटल,
जिसकी कुल कीमत 63.91 लाख रुपये।
धान को संबंधित विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है, और तस्करों को समझा दिया गया है कि धान खरीदी केंद्र कोई ‘ओपन मॉल’ नहीं।
सरकार का नियम और तस्करों का ‘जुगाड़’
छत्तीसगढ़ शासन साफ कह चुका है—
👉 धान खरीदी केवल पंजीकृत किसानों से,
👉 और वह भी निर्धारित खरीदी केंद्रों पर।
लेकिन कुछ लोग नियम को “सलाह” और जुगाड़ को “सिस्टम” मान बैठे थे। पुलिस की यह कार्रवाई उन सबके लिए चेतावनी है, जो सोचते हैं कि धान रात में ट्रक में भरकर सीमा पार कर दिया तो कोई नहीं देखेगा।

आख़िर में…
गरियाबंद पुलिस ने साफ कर दिया है कि—
धान चाहे जितना भी सुनहरा हो, अवैध होगा तो ज़ब्त होगा।
और जो लोग इसे “बिजनेस” समझ रहे हैं, उनके लिए यह खबर नहीं बल्कि अलार्म है।
अभियान जारी है, चेक पोस्ट मुस्तैद हैं और धान तस्करों के लिए रास्ते अब उतने ही कठिन हैं, जितने बिना कागज़ के सरकारी दफ्तर।
क्योंकि गरियाबंद में अब संदेश साफ है—
धान उगाइए, नियम से बेचिए…
वरना पुलिस पहले काटेगी रास्ता, फिर गिनेगी कट्टा।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















