(संवाद एक्सप्रेस) देवभोग गरियाबंद। एक ओर शासन द्वारा “सुशासन तिहार” कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण समस्याओं के समाधान का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के सरपंचों ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जनपद पंचायत परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगभग 53 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंच संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पंचायतों में लंबित विकास कार्यों को शीघ्र स्वीकृति देने, निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक राशि और सामग्री उपलब्ध कराने तथा पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की। सरपंचों का कहना है कि लंबे समय से अधिकारियों को मांगों और समस्याओं से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
धरना स्थल पर पहुंचे सरपंचों में पवन यादव, तूलेश्वरी माझी, परमानंद नागेश, विश्वजीत ठाकुर, ठुकेलश धुर्वा और छायासन सोनवानी सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों से मनरेगा के तहत एक भी पुल-पुलिया या बड़ा निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है। इससे पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और ग्रामीणों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरपंचों ने आरोप लगाया कि पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और विकास कार्यों की फाइलें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। कई बार अधिकारियों से चर्चा करने के बावजूद कार्य स्वीकृति को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें “सुशासन तिहार” जैसे कार्यक्रम से दूरी बनाकर धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि गांवों के विकास के लिए समय पर राशि उपलब्ध नहीं हो रही है, वहीं कई योजनाओं का भुगतान भी लंबे समय से अटका हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने से विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन जमीनी स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं हो रही, जिससे यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने चेतावनी दी कि यदि आने वाले सप्ताह में पंचायतों के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई और मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















