(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद/मैनपुर। सरकारें अक्सर नवाचार की बात करती हैं, लेकिन मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सरगीगुड़ा के टेकनपारा ने तो महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से ऐसा मॉडल पेश कर दिया है, जो शायद किसी नीति आयोग की किताब में भी न मिले—झोपड़ी से कुपोषण दूर करने का अभियान!
बताया जा रहा है कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र पिछले करीब तीन महीनों से खेत के पास बनी एक झोपड़ी में संचालित हो रहा है। भवन की स्वीकृति नहीं होने के कारण नन्हे-मुन्ने बच्चे अब टीन, फूस और तिरपाल की छांव में अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा, पोषण और सुरक्षा—तीनों का ‘समेकित प्रयोग’ एक ही झोपड़ी में चल रहा है।

बारिश के मौसम में जहां आम लोग घर के अंदर सुरक्षित रहने की कोशिश करते हैं, वहीं टेकनपारा के बच्चे प्रकृति के और भी करीब हैं। सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों के साथ सह-अस्तित्व का पाठ शायद यहीं सबसे बेहतर तरीके से पढ़ाया जा रहा है। आखिर बच्चों को बचपन से ही चुनौतियों का सामना करना सीखना चाहिए!

गांव वालों का कहना है कि भवन नहीं होने से बच्चे झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि ग्राम पंचायत की ओर से भी कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही। दूसरी ओर, महिला एवं बाल विकास विभाग को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने की बात कही जा रही है।

ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, ताकि फिर जांच समिति, प्रतिवेदन, कारण बताओ नोटिस और संवेदना संदेशों की पूरी सरकारी परंपरा निभाई जा सके।
फिलहाल टेकनपारा के मासूम बच्चों के हिस्से में भवन नहीं, बल्कि एक झोपड़ी आई है। अब देखना यह है कि सरकारी फाइलें पहले पक्की होंगी या आंगनबाड़ी का भवन? तब तक ‘झोपड़ी मॉडल’ पूरी शान से जारी है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















