(संवाद एक्सप्रेस)गरियाबंद-धमतरी। पक्षी जगत से जुड़ी दो महत्वपूर्ण और रोमांचक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिन्होंने इस संरक्षित क्षेत्र के बढ़ते पारिस्थितिक महत्व और वनों के तेजी से हो रहे पुनर्जीवन की पुष्टि की है।
रिजर्व में हॉर्नबिल मॉनिटरिंग के दौरान बीट गार्ड और हॉर्नबिल ट्रैकर के नेतृत्व वाली टीम ने दुर्लभ दृश्य दर्ज करते हुए मालाबार पाइड हॉर्नबिल को एक फलाहारी चमगादड़ (फ्रूट बैट) का शिकार करते देखा। विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवहार बेहद कम प्रलेखित हुआ है और यह हॉर्नबिल की अवसरवादी भोजन प्रवृत्ति तथा अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में टीम ने क्षेत्र में भारतीय पिट्टा (Pitta brachyura) के एक किशोर (जुवेनाइल) पक्षी का फोटोग्राफ प्राप्त किया। सामान्यतः भारतीय पिट्टा का प्रजनन क्षेत्र हिमालय की तराई और उससे लगे इलाकों तक सीमित माना जाता है। ऐसे में यूएसटीआर में जुवेनाइल पक्षी की मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि इस प्रजाति ने संभवतः स्थानीय स्तर पर या आसपास के परिदृश्य में प्रजनन किया है।

वन विभाग के अनुसार यह खोज इस संभावना को बल देती है कि उदंती-सीतानदी के मध्य भारतीय वन भारतीय पिट्टा के संभावित प्रजनन आवास के रूप में उभर रहे हैं, जिससे पक्षी विज्ञान अनुसंधान और दीर्घकालिक निगरानी के नए अवसर खुलेंगे।
पिछले चार वर्षों में रिजर्व में वन संरक्षण, शिकारी विरोधी अभियान, आवास पुनर्स्थापन और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने जैसे कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप क्षतिग्रस्त और शिकार प्रभावित वन क्षेत्रों में तेजी से पुनर्जनन हुआ है तथा अनेक संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों की वापसी दर्ज की गई है।
रायपुर से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल सहित अनेक दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा भारतीय विशाल गिलहरी और दुर्लभ भारतीय विशाल उड़न गिलहरी के दर्शन भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

वन विभाग का मानना है कि ये नवीन अभिलेख इस तथ्य को पुनः सिद्ध करते हैं कि जब वनों को संरक्षण और पुनर्जीवन का अवसर दिया जाता है, तो वन्यजीव आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह पुनरुत्थान गाथा इसे मध्य भारत के एक महत्वपूर्ण संरक्षण एवं पक्षी अवलोकन केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

Satyanarayan Vishwakarma serves as the Chief Editor of Samwad Express, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering topics such as local and regional developments

















